उत्तर प्रदेशबस्तीसिद्धार्थनगर 

जल जीवन मिशन की पोल खुली: टंकी बनी फव्वारा, भ्रष्टाचार का हुआ नजारा

नौगढ़ में सरकारी भ्रष्टाचार का 'झरना', शुद्ध जल की जगह बह गया जनता का पैसा टेस्टिंग के नाम पर लीपापोती? बचडा-बचडी में पानी की टंकी का 'लीक' होना, गहरे घोटाले का इशारा

​अजीत मिश्रा (खोजी)

‘जल जीवन मिशन’ या भ्रष्टाचार का ‘झरना’: नव निर्मित पानी की टंकी का सच

  • विकास के नाम पर छलावा: पानी की टंकी नहीं, यह तो भ्रष्टाचार का ‘फाल्ट’ है!
  • ‘जल जीवन मिशन’ का अनोखा करिश्मा: घरों तक पहुँचने से पहले ही सड़क पर ‘शुद्ध पेयजल’ का बहाव
  • सिद्धार्थनगर में जल जीवन मिशन का ‘अनोखा’ प्रयोग: टंकी से पानी नहीं, बह रहा है विभाग का भ्रष्टाचार
  • टैंक है या झरना? बचडा-बचडी में ग्रामीणों को मिला सरकारी ‘झरने’ का तोहफा
  • सिद्धार्थनगर: निर्माण के कुछ दिन बाद ही पानी की टंकी से रिसाव, ग्रामीणों में आक्रोश
  • बचडा-बचडी में जल जीवन मिशन पर उठे सवाल, नवनिर्मित टंकी से पानी बहने पर मचा बवाल
  • घटिया सामग्री या प्रशासनिक लापरवाही? टेस्टिंग के नाम पर टंकी से पानी गिरने की घटना पर उठे सवाल

बस्ती मंडल, सिद्धार्थनगर: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ के तहत ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का सपना सिद्धार्थनगर जिले के नौगढ़ विकास खंड स्थित बचडा-बचडी गांव में दम तोड़ता नजर आ रहा है। गांव में बनी नवनिर्मित पानी की टंकी किसी इंजीनियरिंग चमत्कार का उदाहरण नहीं, बल्कि निर्माण कार्य में बरती गई भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार का एक जीता-जागता सबूत बन गई है।

क्या था मामला?

सोमवार को इस टंकी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पानी की टंकी से चारों तरफ झरने की तरह तेज धार में पानी बह रहा है। जिस पानी को ग्रामीणों के घरों तक पहुंचना था, वह टंकी की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए सड़क पर व्यर्थ बहता रहा। इस नजारे को देख वहां मौजूद लोग दंग रह गए और क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई।

प्रशासन की लीपापोती या हकीकत?

एक ओर स्थानीय लोग और ग्राम प्रधान सीधे तौर पर निर्माण कार्य में भारी धांधली और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन अपनी पीठ थपथपाने और मामले को दबाने में जुटा है। प्रशासन का दावा है कि अभी तो यह “निर्माणाधीन” है और इसकी “टेस्टिंग” चल रही थी।

​सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी खजाने से बना बुनियादी ढांचा टेस्टिंग के नाम पर पहली बार में ही झरने में तब्दील हो जाता है? यदि यह टेस्टिंग थी, तो क्या यह इतनी असुरक्षित थी कि आसपास के लोगों में दहशत फैल गई? स्पष्ट है कि प्रशासन का यह तर्क भ्रष्टाचार की परतें छिपाने की एक कमजोर कोशिश मात्र है।

जनता के टैक्स का खुला अपमान

‘जल जीवन मिशन’ का मूल उद्देश्य गांवों में हर घर तक शुद्ध जल पहुंचाना है, लेकिन यदि शुरुआत में ही टंकी से पानी इस कदर रिसने लगे, तो भविष्य में यह ढांचा कितना सुरक्षित रहेगा, यह बड़ा प्रश्न है। यह घटना दर्शाती है कि जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार किस तरह सरकारी धन को पानी की तरह बहा रहे हैं।

​समय आ गया है कि प्रशासन लीपापोती बंद करे और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए। यदि निर्माण में मानकों की अनदेखी हुई है, तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। अन्यथा, यह ‘जल जीवन मिशन’ ग्रामीणों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि एक और सरकारी नाकामी का प्रतीक बनकर रह जाएगा।

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